किसी भी राष्ट्र का वास्तविक विकास उसकी शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर करता है। शिक्षा वह सशक्त माध्यम है जो देश के नागरिकों को जागरूक, कुशल और जिम्मेदार बनाता है। जिस राष्ट्र में शिक्षा का स्तर ऊँचा होता है, वह राष्ट्र सामाजिक, आर्थिक और वैज्ञानिक क्षेत्रों में तेजी से प्रगति करता है।
शिक्षा से राष्ट्र को कुशल मानव संसाधन प्राप्त होते हैं। डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, वैज्ञानिक और प्रशासक—सभी शिक्षा की देन हैं। ये सभी वर्ग मिलकर देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करते हैं। शिक्षित नागरिक नए विचारों और नवाचारों को जन्म देते हैं, जिससे उद्योग, कृषि और तकनीक का विकास होता है।
एक शिक्षित समाज सामाजिक कुरीतियों जैसे अंधविश्वास, भेदभाव और भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज़ उठाता है। शिक्षा लोगों में समानता, स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों की समझ विकसित करती है। इससे राष्ट्र में सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है।
शिक्षा महिलाओं को सशक्त बनाकर राष्ट्र के विकास को दोगुनी गति देती है। जब महिलाएँ शिक्षित होती हैं, तो पूरा परिवार और समाज आगे बढ़ता है। इसके परिणामस्वरूप स्वास्थ्य, पोषण और जीवन स्तर में सुधार होता है, जो राष्ट्र के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
आज के वैश्विक युग में शिक्षा ही राष्ट्र को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाती है। तकनीकी और वैज्ञानिक शिक्षा के बिना कोई भी देश आत्मनिर्भर नहीं बन सकता। इसलिए यह कहा जाता है कि शिक्षा में किया गया निवेश, राष्ट्र के भविष्य में किया गया निवेश है।

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